‘किसी पर दबाव कैसे डाला जा सकता है…’, तमिलनाडु के गवर्नर ने नहीं स्वीकारा विजय का दावा; आया बीजेपी का रिएक्शन

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में अभिनेता विजय की तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) के धमाकेदार प्रदर्शन के बावजूद अगली सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

टीवीके ने 234 सीटों में से 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया, लेकिन बहुमत के आंकड़े 118 से 10 सीटें कम होने के चलते पार्टी गठबंधन की तलाश में जुटी हुई है।

बीजेपी ने की भूमिका से इनकार

भाजपा ने इस पूरे मामले में किसी भी तरह की भूमिका से साफ इनकार कर दिया है। राज्य भाजपा प्रवक्ता नारायणन थिरुपति ने कहा कि राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर अभी भी इस बात से आश्वस्त नहीं हैं कि टीवीके के पास पर्याप्त समर्थन है। थिरुपति ने पीटीआई को बताया कि ‘यह खंडित फैसला है।

टीवीके के पास बहुमत नहीं है। उन्हें अपना बहुमत साबित करना होगा। अगर वे बहुमत साबित कर देते हैं, तो राज्यपाल संवैधानिक रूप से इसे स्वीकार करेंगे। राजभवन या राज्यपाल के बीच कोई भ्रम नहीं है।’

उन्होंने विजय पर दबाव बनाने के आरोपों को भी खारिज किया। थिरुपति ने कहा, ‘यह एक लोकतांत्रिक देश है। चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होते हैं। टीवीके के पास सबसे ज्यादा सीटें हैं। कोई किसी पर दबाव नहीं डाल सकता। ये सब राजनीतिक बयानबाजी है। संविधान के अनुसार जो सही होगा, वही होगा।’

राज्यपाल से दो बार मिले विजय

चुनाव में शदार प्रदर्शन करने के बाद विजय ने कल शाम राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। हालांकि, वे राज्यपाल को यह यकीन नहीं दिला पाए कि गठबंधन समर्थन उनके पास है। आज सुबह वे दोबारा राज्यपाल से मिले। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने विजय से कई सवाल पूछे।

इनमें यह शामिल था कि बहुमत के बिना प्रशासन कैसे चलाएंगे और कौन-सी पार्टियां उनका समर्थन कर सकती हैं। विजय ने अपने कुछ बयानों पर भी सफाई दी। खबरों के मुताबिक, विजय ने खुद को फ्लोर टेस्ट का सामना करने के लिए तैयार बताया है।

कांग्रेस का समर्थन, अन्य दलों से संपर्क

टीवीके ने गठबंधन बनाने के लिए तेजी से कोशिशें शुरू कर दी हैं। कांग्रेस ने पहले ही समर्थन का वादा कर दिया है और पांच विधायकों को विजय के पक्ष में जोड़ा है। इसके अलावा टीवीके ने वीसीके और वामपंथी दलों से भी संपर्क साधा है। तमिलनाडु में इस समय सियासी हलचल तेज है।

टीवीके को 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। अगर पार्टी बहुमत साबित कर देती है तो राज्यपाल संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार फैसला लेंगे। फिलहाल स्थिति साफ नहीं है और सभी की निगाहें फ्लोर टेस्ट और आगे के गठबंधन पर टिकी हुई हैं।

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