अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने श्रमिकों को बधाई देते हुए केंद्र और NDA सरकार पर तीखा हमला बोला।
तेजस्वी ने कहा कि श्रमिकों ने अपनी मेहनत, समर्पण और पसीने से देश निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया है, लेकिन उनके उत्थान और बेहतरी पर गंभीर चर्चा का अभाव चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों, उनके परिवारों और गांवों की प्रगति के बिना ‘विकसित भारत’ की बात करना बेईमानी है।
‘डबल इंजन सरकार की नीतियों से बढ़ा पलायन’
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि NDA की नीतियों का सबसे ज्यादा असर मजदूरों और कामगारों पर पड़ा है। उनके अनुसार, पिछले 21 वर्षों में बिहार से हर साल बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं।
यह एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। तेजस्वी ने कहा कि दूसरे राज्यों में ‘बिहारी’ कभी गोली तो कभी गाली का सामना करते हैं और इसके लिए उन्होंने लंबे समय से सत्ता में रही NDA सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
नोटबंदी-लॉकडाउन का जिक्र, सरकार पर सवाल
उन्होंने नोटबंदी और लॉकडाउन का जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों का सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों पर पड़ा। मजबूरी में मजदूरों को वापस लौटना पड़ा, जिसकी तस्वीर पूरी दुनिया ने देखी।
‘गैस संकट से मजदूर लौट रहे, रोजगार का इंतजाम नहीं’
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि वर्तमान में गैस सिलेंडर की समस्या के कारण बड़ी संख्या में मजदूर बिहार लौट रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार उनके रोजगार और आजीविका के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर रही है।
CM पर तंज, नाम बदलने पर टिप्पणी
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नाम बदलने में माहिर भाजपा नेताओं को ‘श्रमिक दिवस’ का नाम बदलकर ‘बिहार समर्पित दिवस’ कर देना चाहिए, क्योंकि बिहार श्रमिकों की आपूर्ति में आगे है लेकिन औद्योगिक विकास में पीछे रह गया है।
‘पलायन रोकने का संकल्प जरूरी’
तेजस्वी ने कहा कि अगर बिहार के मजदूर बाहर नहीं जाएंगे तो दूसरे राज्यों के उद्योग भी प्रभावित होंगे। उन्होंने ‘विश्व श्रमिक दिवस’ पर सभी से बिहार से पलायन रोकने और श्रमिकों के जीवन में सुधार के लिए संकल्प लेने की अपील की।


