सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंडी में न्यायिक परिसर के शिलान्यास के बाद संगोष्ठी में कहा कि हम बोलने के अधिकार के नाम पर अपने मौलिक कर्तव्य को भूल जाते हैं। हमें अपने अधिकार के साथ दूसरों के मान सम्मान और कर्तव्य का भी ध्यान रखना होगा। मंडी में मौलिक कर्तव्य पर आयोजित गोष्ठी व विधिक साक्षरता शिविर में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मौलिक कर्तव्यों का पाठ पढ़ाया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि मैं हिमाचल प्रदेश लीगल सर्विस अथॉरिटी को बधाई देता हूं, जिन्होंने मौलिक कर्तव्य पर यह कार्यक्रम रखा। क्योंकि मौलिक कर्तव्यों को लागू करने के लिए बहुत व्यवस्था नहीं है।
मौलिक कर्तव्य का भी रखें ध्यान
मैंने किसी को प्रश्न किया कि आप अभद्र भाषा में टीवी, पोडकास्ट, कोई भी चैनल में कोई भी कार्यक्रम देखते हैं और अपने मां-बेटी और बहन के मान सम्मान का भी ध्यान नहीं रखते, और फिर कोई प्रश्न करे तो आप कहते हैं कि आपका मौलिक अधिकार है। बोलने का अधिकार है। यह विडंबना है कि बोलने के अधिकार के नाम पर हम यह ध्यान नहीं रख रहे कि हमारा मौलिक कर्तव्य भी है।
सीजेआई ने कहा कि मौलिक अधिकारों के लिए देश ने लड़ाई लड़ी है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान बनने तक। अंग्रेजों को भेजना ही मकसद नहीं था। भारत के लोगों को न्याय मिले। कई रसूखदार अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के नाम पर दूसरे के अधिकारों का हनन करते हैं। इसलिए कर्तव्य की बात आई। आज कर्तव्य हमारे संविधान का हिस्सा है। इसलिए हमारे जिम्मेदारी है उसकी पालना करें।


