अंबाला निजी खेल नर्सरियों के आवेदन की अंतिम तिथि करीब, पिछले साल नहीं हुई थी एक भी आवंटित

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 खेल विभाग द्वारा निजी खेल नर्सरियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, जबकि अब महज पांच दिन बचे हैं। इसके बाद पता चल जाएगा कि खेल नर्सरियां चलाने में निजी सेक्टर कितनी दिलचस्पी ले रहा है। बीते साल की बात करें, तो अंबाला से महज 45 निजी खेल नर्सरियों के लिए आवेदन हुआ था। इस बार भी आवेदन मांगे गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार निजी खेल नर्सरियों के आवेदनों में कमी आ सकती है।

हालांकि पुख्ता तौर पर कहा नहीं जा सकता, जबकि स्थिति पांच दिन के बाद क्लीयर होगी। सूत्र बताते हैं कि हो सकता है कि आवेदन की तिथि को आगे बढ़ा दिया जाए। माना जा रहा है कि इस बार एक अप्रैल से खेल नर्सरियों को शुरु करने की तैयारी है। खेल विभाग के प्रशिक्षक अपनी खेल नर्सरियां तो एक अप्रैल से शुरू कर लेंगे, जबकि निजी खेल नर्सरियों को एक अप्रैल से शुरू करने के लिए आवेदन प्रक्रिया व खेल नर्सरियों का इनफ्रास्ट्रक्चर चेक करने के लिए एक अप्रैल से पूरा किया जाए।

बीते साल नहीं की गई निजी खेल नर्सरियां अलॉट

खेल सत्र 2025-26 में भी खेल विभाग द्वारा निजी खेल नर्सरियों से आवेदन मांगे थे। इस में करीब 45 खेल नर्सरियों ने आवेदन किया था। इसको लेकर आवेदन की तिथि को भी एक बार बढ़ाया गया था। इन खेल नर्सरियों का उपनिदेशक खेल द्वारा सर्वे किया गया और रिपोर्ट भी खेल विभाग को भेजी गई थी।

दूसरी ओर इन खेल नर्सरियों को शुरू करने के लिए इंतजार रहा, लेकिन यह शुरू नहीं हो पाईं। पूरे सत्र में इन निजी खेल नर्सरियों को अलॉट करने की उम्मीद रही, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता रहा, यह खेल नर्सरियां अलॉट ही नहीं की जा सकी।

कम हो सकते हैं आवेदन

सूत्रों का कहना है कि निजी खेल नर्सरियों की बात करें, तो आवेदनों की संख्या या तो पहले की तरह रहेगी या फिर इससे कम होगी। इसका कारण यह है कि निजी खेल नर्सरियों के संचालकों में असमंजस की स्थिति हो सकती है क्यों कि बीते साल आवेदन व सर्वे के बावजूद इनको शुरू नहीं किया जा सका।

इस बार क्या स्थिति रहेगी, इसके बारे में कह नहीं सकते, लेकिन माना जा रहा है कि अंबाला में ऐसी खेल नर्सरियों के लिए शायद ही आवेदनों में बढ़ोतरी हो। दूसरा बड़ा कारण खेल नर्सरियों के खिलाड़ियों को समय पर डाइट मनी न मिलना है, जबकि खेल प्रशिक्षकों के मानदेय को लेकर भी स्थिति कई बार ऐसी ही रहती है।

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