बांस-बल्ली के सहारे तार खींचकर सिंचाई कर रहे किसान, जान जोखिम में डालकर कर रहे पटवन

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राज्य सरकार किसानों को सिंचाई सुविधा बेहतर करने के लिए मुफ्त बिजली कनेक्शन और अलग कृषि फीडर दे रही है। लेकिन कैमूर जिले में यह योजना अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसानों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनती जा रही है।

खेतों तक बिजली पहुंचाने के लिए पोल और तार नहीं दिए गए हैं। जिससे किसान बांस बल्ली के सहारे बिजली के तार खींचकर खेतों में सिंचाई कर रहे हैं। रामपुर प्रखंड के सभी पंचायत के बधार में किसानों ने अपनी फसलों की सिंचाई करने के लिए सबमर्सिबल और मोटर चलाने के लिए बोरिंग कराया है।

विभाग द्वारा तार और पोल नहीं लगाया गया

मोटर पंप चलाने के लिए किसानों ने बिजली विभाग द्वारा कनेक्शन भी लिया है। इसके बाद भी बिजली विभाग द्वारा तार और पोल नहीं लगाया गया है। जिसके कारण किसान को मोटर पंप चलाने के लिए काफी परेशानी होती है।

प्रत्येक वर्ष खरीफ फसल के सीजन में दो चार किसानों की मौत और एक दर्जन से अधिक किसान करंट की चपेट में आने से घायल होते हैं। गांव में तार बांस बल्ली के सहारे फिर जमीन पर बिछाकर पटवन करने के लिए खेतों तक ले जाते हैं।

तार व पोल लगाने के लिए कई बार गुहार

जबकि संबंधित किसान विभागीय पदाधिकारी से बार-बार मिलकर संबंधित जगह तक तार व पोल लगाने के लिए कई बार गुहार लगाते हैं। उन्हें वहां आश्वासन मिलता है लेकिन पोल और तार लगाने के लिए अब तक कुछ नहीं हुआ है।

सभी पंचायतों में है समस्या

किसानों का कहना है कि अब हम लोग एकजुट होकर डीएम से मिलकर अपनी समस्या से अवगत कराएंगे। ताकि हम लोगों को समस्या दूर कर सकें। यह हाल प्रखंड के सभी पंचायत के गांव के बधार में देखा जा सकता है।

किसानों ने बताया कि कृषि कनेक्शन के लिए हुए करीब चार वर्ष हो गए लेकिन अब तक विभाग द्वारा बोरिंग तक तार व पोल खींचकर नहीं ले जाया गया है। इस स्थिति में जरूरत पड़ने पर कवरयुक्त तार को बांस के सहारे या फर्श को बेचकर अपने बोरिंग तक ले जाए ले जाते हैं। फसल की सिंचाई कर सभी सामानों को समेट कर घर लाया जाता है। ऐसे में समय के साथ आर्थिक क्षति होती है।

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