मराठी-हिंदी विवाद में युवक की आत्महत्या के मुद्दे पर बाल ठाकरे स्मृति स्थल पर धरना देगी BJP, राज ठाकरे पर साधा निशाना

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हिंदी बोलने पर लोकल ट्रेन में पिटाई के बाद मराठी युवक की आत्महत्या के मुद्दे पर शनिवार को मुंबई भाजपा शिवाजी पार्क स्थित बालासाहेब ठाकरे स्मृति स्थल पर धरना देगी। भाजपा का कहना है कि शिवसेना-मनसे द्वारा भाषा के नाम पर बोया जा रहा जहर अब मऱाठी भाषियों को ही खाने लगा है।

मुंबई भाजपा के अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि आत्महत्या करनेवाले युवक अर्णव खैरे की मौत से पता चलता है कि भाषा और प्रांतवाद के नाम पर कुछ राजनीतिक दलों द्वारा किस प्रकार से विष बोया जा रहा है। ऐसी प्रवृत्ति के लोगों को सदबुद्धि देने की प्रार्थना शनिवार को 12 बजे शिवाजी पार्क स्थित बालासाहेब के स्मृति स्थल के निकट बैठकर की जाएगी।

शिवसेना शिंदे गुट का नहीं आया कोई बयान

वहीं मुंबई भाजपा के महासचिव आचार्य पवन त्रिपाठी ने शिवसेना-मनसे द्वारा भाषाई विवाद पैदा करने को विकृत मानसिकता करार देते हुए कहा कि ऐसे लोग किसी भाषा के पोषक नहीं हो सकते, जो अपनी भाषा मनवाने के लिए हिंसा का सहारा लेते हों। भाषा संपर्क का और लोगो को जोड़ने का माध्यम है।

इससे दुखद कुछ भी नहीं हो सकता कि भाषा के लिए मारपीट हो रही है। लेकिन आश्चर्य है कि भाषाई विवाद में एक मराठी युवक की आत्महत्या के बाद सरकार में शामिल शिवसेना शिंदे गुट का भी कोई बयान अब तक सामने नहीं आया है।

न ही कांग्रेस या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का।दूसरी ओर राज ठाकरे की पार्टी द्वारा भाषा के नाम पर फैलाई जा रही अराजकता के विरुद्ध कुछ माह पहले वकील घनश्याम उपाध्याय द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दो दिन पहले ही बांबे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, केंद्र सरकार एवं चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है।

महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी

घनश्याम उपाध्याय ने अपनी याचिका में दो मांगें की हैं। एक तो राज ठाकरे के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर उनपर कानूनी कार्रवाई करने का और दूसरी, उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की मान्यता रद करने की। इस याचिका पर सुनवाई कर रहे बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर ने पार्टी की मान्यता रद करने के मुद्दे पर चुनाव आयोग एवं केंद्र सरकार से तथा राज ठाकरे के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता वकील घनश्याम उपाध्याय का कहना है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें तथा चुनाव आयोग अपने जवाब दाखिल करेगा, तो वह अर्णव खैरे की घटना का उल्लेख करते हुए एक परिशिष्ट अपनी याचिका में जोड़ेंगे और राज ठाकरे द्वारा फैलाए जा रहे विष की ओर कोर्ट का ध्यान आकर्षित करेंगे।

यह है पूरा मामला

19 वर्षीय अर्णव खैरे मुलुंड स्थित केलकर कालेज में बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र था। 18 नवंबर की सुबह वह कालेज जाने के लिए लोकल ट्रेन से यात्रा कर रहा था। भीड़ भरी लोकल ट्रेन में उसने अपने आगे खड़े किसी यात्री से कहा कि मुझे पीछे से धक्का आ रहा है, थोड़ा आगे बढ़ो।

उसके इतना कहते ही यात्रियों का एक समूह उसे हिंदी में बोलने के कारण पीटने लगा। जब उसने बताया कि वह स्वयं मराठी है, तो उसे यह कहकर पीटा गया कि मराठी बोलने में शर्म आती है क्या। पिटाई से डरा अर्णव पहले तो अपने गंतव्य से एक स्टेशन पहले ही उतरकर दूसरी ट्रेन से कालेज गया। फिर घर लौटकर उसने पूरी घटना अपने पिता को बताई और फिर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

लेकिन इस गंभीर घटना के बावजूद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की सोच में कोई परिवर्तन आता नहीं दिख रहा है। उसके प्रवक्ता संदीप देशपांडे ने इस घटना के लिए भी परप्रांतियों एवं भाजपा को ही जिम्मेदार ठहराया है।

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