डीजे वाले गानों पर भारी है इस हरियाणवी लोकगीत का देसी रोमांस, काली साड़ी पहनकर पिया को रिझाना चाहती है पत्नी
शादी वाले घर का आंगन, ढोलक की थाप, हंसी-ठिठोली करती महिलाएं और इन सबके बीच गूंजता एक ठेठ देसी हरियाणवी गीत! यूं तो आजकल शादियों में डीजे का भारी शोर होता है, लेकिन जब बात नई-नवेली दुल्हन की अपने पति से ‘काले रंग की साड़ी’ लाने की जिद की आती है, तो यह चुलबुला लोकगीत आज भी महफिल लूट लेता है।
पिया से ‘ब्लैक साड़ी’ की डिमांड कर रही दुल्हन
“काले रंग की साड़ी, ला दो पिया जी,
काले रंग की साड़ी…
काले रंग की साड़ी जब खिले, जब माथे पे टीका होए पिया जी…
जब माथे पे टीका होए पिया जी…”
इस लोकगीत की सबसे दिलचस्प बात दुल्हन की मासूम फरमाइश और उसका बेबाक अंदाज है। वह अपने पति से बड़े लाड़ के साथ काले रंग की साड़ी मांगती है। ग्रामीण परिवेश में अक्सर काले रंग के कपड़ों को लेकर बड़े-बुजुर्गों की अपनी कुछ पाबंदियां या मान्यताएं होती हैं। हालांकि, दुल्हन को इन नियमों से ज्यादा इस बात की परवाह है कि जब वह अपने मनपसंद रंग की साड़ी पहनकर सजेगी, तो अपने पिया के साथ उसकी जोड़ी कितनी खूबसूरत लगेगी।
घूंघट की आड़ में रोमांस और ससुराल की पाबंदियां
पुराने समय में जब घूंघट और कड़े पारिवारिक नियमों के चलते पति-पत्नी सबके सामने बात नहीं कर पाते थे, तब महिलाएं लोकगीतों के जरिए ही अपनी दबी हुई इच्छाएं और रोमांस जाहिर करती थीं। सखियों और ननद-भाभी के बीच गाए जाने वाले इस गीत के बहाने दुल्हन दरअसल यह जताती है कि ससुराल की टोक-टाक के बीच भी, उसका पति उससे कितना प्यार करता है और उसकी हर छोटी-बड़ी जिद पूरी करने को तैयार रहता है। बता दें, इसे लोकप्रिय बनाने में सुनीता पंचाल और प्रीति चौधरी जैसे कलाकारों का बड़ा हाथ है।
आंगन की ढोलक से डीजे फ्लोर तक का सफर
दिनभर घर के कामों की थकान मिटाने और हंसी-मजाक करने के लिए गाए जाने वाले ये गीत आज भी उतने ही मशहूर हैं। ढोलक की थाप पर जब महिलाएं इस गीत को गाती हैं, तो आंगनों से लेकर मॉडर्न शादियों के डीजे फ्लोर तक, हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और कदम खुद-ब-खुद थिरकने लगते हैं। यह गीत पति-पत्नी के रिश्ते की उसी मिठास का प्रतीक है, जो कभी पुरानी नहीं पड़ती।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

