योगी आदित्यनाथ का राहुल गांधी पर निशाना, बोले- आजादी की लड़ाई में महाशय मसूरिया दीन पासी भी जेल गए थे
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी महाशय मसूरिया दीन पासी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में वे भी जेल गए थे। योगी के इस बयान ने स्वतंत्रता संग्राम में वंचित समुदायों के योगदान और ऐतिहासिक नायकों की पहचान से जुड़े मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
महाशय मसूरिया दीन पासी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी और स्वतंत्र भारत की राजनीति में सक्रिय रहे प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया और कई बार जेल गए। ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, उन्होंने नमक सत्याग्रह के दौरान भी भाग लिया था। बाद में वे संविधान सभा के सदस्य बने और लोकसभा के लिए भी चुने गए।
कौन थे महाशय मसूरिया दीन पासी?
महाशय मसूरिया दीन पासी का जन्म 2 अक्टूबर 1911 को प्रयागराज के जोंधवल में हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और 1932 से 1944 के बीच कई बार जेल गए।
आजादी के बाद उन्होंने संविधान सभा और संसद में अपनी भूमिका निभाई। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी सक्रिय रहे और शुरुआती लोकसभा चुनावों में सांसद चुने गए। उनका राजनीतिक सफर स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत की संसदीय व्यवस्था तक फैला रहा।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर जोर
योगी आदित्यनाथ के बयान का मुख्य संदेश स्वतंत्रता आंदोलन में महाशय मसूरिया दीन पासी जैसे नेताओं के योगदान को याद करना है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों ने हिस्सा लिया था। इनमें कई ऐसे सेनानी भी थे, जिनका योगदान व्यापक ऐतिहासिक चर्चाओं में अपेक्षाकृत कम सामने आया।
महाशय मसूरिया दीन पासी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले अनेक नेता आजादी के बाद भी लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसदीय राजनीति से जुड़े रहे।
राहुल गांधी के संदर्भ में बयान क्यों अहम?
राहुल गांधी का नाम लेकर दिया गया यह बयान राजनीतिक विमर्श के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दलों ने समय-समय पर महाशय मसूरिया दीन पासी और पासी समुदाय से जुड़े ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख किया है। जुलाई 2024 में कांग्रेस ने भी मसूरिया दीन पासी की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।
इस तरह स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत, उनके ऐतिहासिक योगदान और उन्हें सार्वजनिक स्मृति में उचित स्थान देने का विषय राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बना हुआ है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

