नदीम खान को घर में नजरबंद करने पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, पूछा- घर में घुसकर पुलिस कैसे कर सकती है नजरबंद?
दिल्ली में एक्टिविस्ट नदीम खान को घर में नजरबंद किए जाने के मामले ने कानूनी और प्रशासनिक हलकों में ध्यान खींचा है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर पुलिस किसी व्यक्ति के घर में घुसकर उसे नजरबंद कैसे कर सकती है? अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई और उसके कानूनी आधार को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
नदीम खान को कथित तौर पर घर में नजरबंद किए जाने को लेकर उठे सवालों के बीच हाईकोर्ट ने यह जानना चाहा कि पुलिस ने किस अधिकार के तहत यह कदम उठाया। किसी व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगाने या उसे उसके घर तक सीमित रखने की कार्रवाई के लिए कानूनी आधार क्या है, यह इस मामले का अहम पहलू बन गया है।
मामले में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, पुलिस के अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन से जुड़े कानूनी सवाल भी सामने आए हैं। हालांकि, अदालत में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार, 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने नदीम खान की याचिका पर उसी दिन तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि हिरासत या यात्रा पर रोक लगाने से संबंधित कोई लिखित आदेश रिकॉर्ड पर नहीं है और मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर को की जाएगी।
नदीम खान की ओर से आरोप लगाया गया है कि 29 सितंबर को उन्हें दिल्ली के अबुल फजल एन्क्लेव स्थित जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में सुबह करीब 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रोका गया था, ताकि वे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल न हो सकें। उनकी ओर से इस कार्रवाई को अवैध हिरासत बताते हुए अदालत से राहत मांगी गई है।
अब इस मामले में अदालत की सुनवाई पर नजर रहेगी। मुख्य सवाल यह है कि पुलिस किसी व्यक्ति की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के लिए किन कानूनी प्रावधानों का सहारा ले सकती है और ऐसी कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
यह मामला कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की जिम्मेदारी और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन से जुड़ा है। अदालत में लगाए गए आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के कानूनी आधार पर आगे होने वाली सुनवाई से मामले की स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में 9 अक्टूबर को तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने की पुष्टि है। इसलिए पुलिस के घर में घुसकर नजरबंद करने पर हाईकोर्ट की कथित टिप्पणी को अदालत का पुष्ट आदेश या अंतिम फैसला बताने से पहले संबंधित सुनवाई की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना उचित होगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

