बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट पर फिल्माया गया एक लोकप्रिय गाना अपनी धुन और भावनाओं के लिए काफी पसंद किया जाता है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इस गाने की धुन की जड़ें कश्मीरी लोकसंगीत से जुड़ी बताई जाती हैं। इसकी कहानी कश्मीर की पारंपरिक ‘वानवुन’ गायन शैली और बेटियों की विदाई की भावनाओं से जुड़ी है।
कश्मीर में ‘वानवुन’ पारंपरिक रूप से शादी-ब्याह और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से गाए जाने वाले लोकगीतों की शैली है। इन गीतों में रिश्तों, परिवार, प्रेम और विदाई जैसी भावनाओं को लोकधुनों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।
बेटी की शादी और विदाई कश्मीरी लोकपरंपरा में भावनात्मक अवसर माना जाता है। वानवुन में इस दौरान बेटी के मायके से विदा होने, परिवार से बिछड़ने और नए जीवन की ओर बढ़ने से जुड़ी भावनाएं गीतों के जरिए सामने आती हैं।
इसी पारंपरिक लोकधुन की छाप बॉलीवुड के इस गाने में भी नजर आती है। आधुनिक संगीत और फिल्मी प्रस्तुति के बावजूद इसकी धुन में कश्मीरी लोकसंगीत की झलक श्रोताओं को आकर्षित करती है। यही वजह है कि यह गाना मनोरंजन के साथ-साथ कश्मीर की समृद्ध लोकसांस्कृतिक परंपरा की याद भी दिलाता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

