क्या लद्दाख छीन पाएगा कश्मीर से ‘रेड गोल्ड’ का ताज? लेह में शुरू हुई केसर की खेती

4.1kViews

लद्दाख के लेह में अब ‘रेड गोल्ड’ यानी केसर की खेती का प्रयोग शुरू किया गया है। ठंडे रेगिस्तान के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में पहली बार बड़े पैमाने पर केसर की खेती के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि लद्दाख कश्मीर के केसर उत्पादन की जगह ले पाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, लेह के स्पितुक फार्का क्षेत्र में करीब 4,000 वर्ग मीटर जमीन पर लगभग 90 हजार ईरानी केसर कंद लगाए गए हैं। करीब 800 किलोग्राम कंदों से शुरू किए गए इस प्रयोग का उद्देश्य बंजर जमीन को कृषि योग्य बनाकर उच्च मूल्य वाली फसल का उत्पादन करना है।

बंजर जमीन पर उगाया जा रहा ‘रेड गोल्ड’

यह परियोजना उस जमीन पर शुरू की गई है, जिसे हाल में पुनर्जीवित किया गया है। सिंचाई की व्यवस्था के जरिए जमीन को खेती के लिए तैयार किया गया है। अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि प्रयोग सफल होने पर लद्दाख में किसानों, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए आय का नया स्रोत तैयार हो सकता है।

कश्मीर का केसर से पुराना रिश्ता

भारत में केसर का प्रमुख उत्पादन जम्मू-कश्मीर में होता है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, कश्मीर केसर को 2020 में जीआई टैग भी मिला था। कश्मीर के पंपोर और आसपास के क्षेत्रों में केसर की खेती लंबे समय से होती रही है और यह क्षेत्र इसकी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।

क्या लद्दाख दे पाएगा कश्मीर को चुनौती?

फिलहाल लद्दाख की कोशिश को कश्मीर के केसर उत्पादन के विकल्प के बजाय कृषि विविधीकरण के प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। लद्दाख में खेती की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उत्पादन और गुणवत्ता के नतीजों का इंतजार करना होगा।

अगर प्रयोग सफल रहता है, तो बंजर जमीन के इस्तेमाल और स्थानीय स्तर पर उच्च मूल्य वाली फसल के उत्पादन की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *