चिट्ठियों से बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं तक, 172 साल में ऐसे बदला डाकघर; कोडरमा में 85 डाकघरों का नेटवर्क

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एक दौर था जब डाकिया घर की दहलीज पर चिट्ठी लेकर पहुंचता था तो परिवार के चेहरे पर खुशी झलक उठती थी। अपनों का हाल जानने और संदेश भेजने का सबसे भरोसेमंद माध्यम चिट्ठियां हुआ करती थीं। समय के साथ संचार के तौर-तरीके बदले और ईमेल, एसएमएस तथा मोबाइल मैसेज ने चिट्ठियों की जगह ले ली। इसके बावजूद भारतीय डाक की भूमिका खत्म नहीं हुई, बल्कि उसका स्वरूप लगातार बदलता गया।

1 अक्टूबर 1854 को भारत में आधुनिक डाक विभाग की स्थापना हुई थी। 172 वर्षों के सफर में डाक व्यवस्था ने संचार के पारंपरिक माध्यम से आगे बढ़कर बैंकिंग, बीमा, बचत योजनाओं, पार्सल और डिजिटल सेवाओं तक अपनी पहुंच बनाई है।

डाक टिकटों में दर्ज हुआ झारखंड का इतिहास

झारखंड के डाक इतिहास में भी कई महत्वपूर्ण अध्याय दर्ज हैं। वर्ष 1955 में कोडरमा के तिलैया डैम और धनबाद के सिंदरी उर्वरक कारखाने पर डाक टिकट जारी किए गए थे। इन टिकटों के जरिए क्षेत्र की औद्योगिक और विकास यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

इसके अलावा भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, जमशेदजी टाटा, जहांगीर टाटा और दिवंगत आईपीएस रणधीर प्रसाद वर्मा जैसी विभूतियों को भी डाक टिकटों पर स्थान मिला। इस तरह डाक टिकट केवल संदेश भेजने का माध्यम नहीं रहे, बल्कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्ज करने का जरिया भी बने।

अब डाकघर में बैंकिंग से डिजिटल सेवाओं तक

डिजिटल दौर में डाकघरों की सेवाओं का दायरा काफी बढ़ गया है। अब यहां बचत योजनाओं, बैंकिंग, बीमा, सुकन्या समृद्धि योजना और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक जैसी सुविधाओं के साथ कई डिजिटल सेवाएं भी उपलब्ध हैं। इंडिया पोस्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक देश में 1,64,999 डाकघर कार्यरत थे, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में है।

डाक विभाग का नेटवर्क दूरदराज के इलाकों तक सेवाएं पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि मोबाइल और इंटरनेट के दौर में भी डाकघर केवल चिट्ठियां पहुंचाने वाली संस्था नहीं रह गया है।

कोरोना काल में भी निभाई जिम्मेदारी

कोरोना महामारी के दौरान सामान्य परिवहन और जनजीवन प्रभावित होने के बावजूद डाक विभाग ने जरूरी सामान और दवाइयों की डिलीवरी में भूमिका निभाई। इसके अलावा धार्मिक प्रसाद और स्थानीय उत्पादों को दूसरे शहरों तक पहुंचाने में भी डाक नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कोडरमा में 85 डाकघरों का नेटवर्क

कोडरमा जिले में वर्तमान में एक मुख्य डाकघर, सात उप डाकघर और 77 शाखा डाकघर मिलाकर कुल 85 डाकघरों का नेटवर्क बताया गया है। इसके जरिए जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डाक से जुड़ी सेवाओं के साथ बैंकिंग और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस तरह 172 साल का सफर बताता है कि तकनीक और संचार के साधन बदलने के बावजूद भारतीय डाक ने समय के साथ अपनी सेवाओं का विस्तार किया है। चिट्ठियों के दौर से शुरू हुआ यह नेटवर्क आज डिजिटल और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच चुका है।

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