तबादला हुए दो महीने बीते, फिर भी जयंत चौकी पर ‘पूर्व प्रभारी’ का असर? आखिर किसके इशारे पर चल रही चौकी!
रिलीव होने के बाद भी नहीं टूटा मोह, सूत्रों के गंभीर आरोप-‘साहब’ के नाम पर चल रहा है लिफाफे का खेल?
सिंगरौली। सिंगरौली जिले की जयंत पुलिस चौकी को लेकर इन दिनों गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि चौकी के पूर्व प्रभारी का स्थानांतरण हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं और उन्हें सिंगरौली पुलिस अधीक्षक द्वारा रिलीव भी किया जा चुका है। इसके बावजूद सूत्रों का दावा है कि पूर्व चौकी प्रभारी का प्रभाव आज भी जयंत चौकी क्षेत्र के कामकाज पर बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, स्थानांतरण और रिलीविंग के बाद भी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण कार्य कथित तौर पर पूर्व चौकी प्रभारी के इशारे पर संचालित होने की चर्चा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण हो चुका है और उन्हें विधिवत रिलीव भी कर दिया गया है, तो आखिर जयंत चौकी के कामकाज में उनका प्रभाव किस आधार पर बना हुआ है?

क्या अब भी नहीं टूटा जयंत चौकी से मोह?
जयंत क्षेत्र में इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि पूर्व चौकी प्रभारी का चौकी से मोह अभी तक भंग नहीं हुआ है। सूत्रों का आरोप है कि क्षेत्र में होने वाले विभिन्न कार्यों और गतिविधियों पर आज भी कथित रूप से उनकी पकड़ बनी हुई है।
इतना ही नहीं, कुछ सूत्रों ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पूर्व चौकी प्रभारी के नाम का सहारा लेकर क्षेत्र के कुछ कारोबारियों से समय-समय पर कथित तौर पर “लिफाफा” लेने का खेल भी चल रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह मामला पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानांतरण के बाद भी प्रभाव कैसे?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी चौकी प्रभारी का स्थानांतरण हो जाने और पुलिस अधीक्षक द्वारा रिलीव किए जाने के बाद भी आखिर उनका कथित प्रभाव क्षेत्र के कामकाज पर कैसे बना हुआ है? क्या चौकी में तैनात वर्तमान व्यवस्था स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही है, या फिर पूर्व प्रभारी का प्रभाव अभी भी इतना मजबूत है कि क्षेत्र के निर्णय उनके इशारे के बिना नहीं हो पा रहे?
लोगों के बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय और डीजीपी के आदेशों से भी ऊपर किसी पूर्व चौकी प्रभारी का प्रभाव हो सकता है? यदि तबादले और रिलीविंग के बावजूद कोई अधिकारी अपने पुराने क्षेत्र में कथित तौर पर हस्तक्षेप करता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
क्या पुलिस अधीक्षक तक नहीं पहुंची जानकारी?
सूत्रों का कहना है कि जयंत चौकी क्षेत्र में चल रही इन चर्चाओं और कथित गतिविधियों की जानकारी संभवतः सिंगरौली पुलिस अधीक्षक तक नहीं पहुंची है। लेकिन यदि पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान हैं, तो यह भी जांच का विषय है कि आखिर क्षेत्र में पूर्व चौकी प्रभारी के नाम पर कथित तौर पर चल रहे इस खेल की जानकारी उच्च अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंच रही।
अब जरूरत है कि सिंगरौली पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराए। यदि पूर्व चौकी प्रभारी का स्थानांतरण होने के बावजूद चौकी के कार्यों में उनका कोई अनुचित हस्तक्षेप पाया जाता है, या उनके नाम का इस्तेमाल कर किसी कारोबारी से कथित तौर पर लिफाफा का खेल जारी है, तो इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
जयंत चौकी को लेकर उठ रहे सवाल केवल एक पूर्व चौकी प्रभारी के प्रभाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पुलिस प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हैं। आखिर—
- स्थानांतरण और रिलीविंग के बाद भी पूर्व प्रभारी का कथित प्रभाव क्यों बना हुआ है?
- क्षेत्र के कामकाज को कौन और किसके इशारे पर संचालित कर रहा है?
- पूर्व प्रभारी के नाम पर कारोबारियों से कथित ‘लिफाफा’ की चर्चा में कितनी सच्चाई है?
- क्या इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक तक नहीं पहुंची है?
- और सबसे बड़ा सवाल—क्या मध्यप्रदेश के डीजीपी के आदेशों से भी बड़ा किसी पूर्व चौकी प्रभारी का प्रभाव है?
इन सभी सवालों का जवाब अब सिंगरौली पुलिस प्रशासन की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। फिलहाल, जयंत चौकी से पूर्व प्रभारी का मोह खत्म न होने और उनके नाम पर कथित तौर पर चल रहे खेल की चर्चाएं क्षेत्र में लगातार बनी हुई हैं। जिसकी जानकारी क्षेत्र में चौकी क्षेत्र की जानकारी रखने वाले सभी लोगों को है। यही नहीं, जानकारी तो चौकी में तैनात लगभग सभी कर्मचारियों को भी है लेकिन लगभग सभी दबी जुबान में बात कर रहे हैं कि जल्द साहब की वापसी होने वाली है?

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

