बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी आमने-सामने हैं।
बयानबाजी के बीच अब राजद और मांझी परिवार भी आमने-सामने आ गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के तंज के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य ने आरक्षण की समीक्षा का विरोध किया।
दीपा मांझी ने अपने एक्स हैंडल पर लंबी पोस्ट लिखकर कहा कि उन्हें ‘सिंगापुर की शाही जिंदगी जीने वालों’ से ज्ञान नहीं चाहिए, बल्कि गरीबों को उनका हक और हिस्सा चाहिए।
हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका निशाना रोहिणी आचार्य की ओर माना जा रहा है।
रोहिणी आचार्य ने आरक्षण की समीक्षा पर जताया विरोध
इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच हुई। रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा कि जब तक सामाजिक और आर्थिक गैर-बराबरी कायम है, तब तक आरक्षण की व्यवस्था की किसी भी प्रकार की समीक्षा उचित नहीं है।
उनके इस बयान के बाद दीपा मांझी ने आरक्षण के लाभ को सबसे वंचित वर्गों तक पहुंचाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि वे गरीबों और वंचितों की बात कर रही हैं और मुद्दे से भटकने के बजाय उनके सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
‘हमें ज्ञान नहीं, हक और हिस्सा चाहिए’
दीपा मांझी ने कहा कि सिंगापुर की शाही जिंदगी और हजारों करोड़ की कथित संपत्ति के बीच बैठकर आरक्षण और सामाजिक न्याय पर ज्ञान देना आसान है।
लेकिन उस गरीब की पीड़ा समझना मुश्किल है, जिसके बच्चों को आज भी दो वक्त का भोजन, दवाई, अच्छी शिक्षा और सिर के ऊपर छत के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी की कृपा नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक वंचना के खिलाफ मिला संवैधानिक अधिकार है।
अगर आजादी के करीब 80 साल बाद भी समाज के कई वर्ग शिक्षा, नौकरी और प्रतिनिधित्व में पीछे हैं तो यह सवाल उठना चाहिए कि आरक्षण का लाभ किन लोगों तक पहुंचा और जो सबसे पीछे हैं, उन्हें उनका हिस्सा कब मिलेगा।
‘हम अपने कोटे में कोटा मांग रहे हैं’
दीपा मांझी ने अपनी पोस्ट में आरक्षण के भीतर कोटा यानी कोटा में कोटा की मांग को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वे किसी का हक छीनने की बात नहीं कर रही हैं, बल्कि अपने कोटे में कोटा चाहती हैं, ताकि सबसे अधिक वंचित वर्गों को भी अवसर और प्रतिनिधित्व मिल सके।
उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि जिसकी जितनी भागीदारी हो, उसकी उतनी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो। उनके मुताबिक आरक्षण का लाभ समाज के सबसे पीछे खड़े व्यक्ति तक भी पहुंचना चाहिए।
लालू परिवार पर भी साधा निशाना
दीपा मांझी ने अपने पोस्ट में लालू परिवार पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने बिना नाम लिए ‘माफियाओं के सरदार और सरदारनी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यदि जवाब है तो सवालों का जवाब दिया जाए, ज्ञान नहीं दिया जाए।
उन्होंने कहा कि मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि व्यवस्था का है। सवाल यह है कि गरीब का हिस्सा कौन दिलाएगा और जिन वर्गों का प्रतिनिधित्व आज भी नगण्य है, उनका अधिकार कौन सुनिश्चित करेगा।
आरक्षण पर NDA के भीतर भी मतभेद
आरक्षण को लेकर चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच पहले से ही मतभेद सामने आ चुके हैं। अब इस बहस में राजद की ओर से तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्य तथा मांझी परिवार की ओर से दीपा मांझी के उतरने से राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
दीपा मांझी ने अपनी पोस्ट का अंत करते हुए कहा कि आरक्षण रहेगा, लेकिन इसका लाभ समाज के सबसे पीछे खड़े व्यक्ति तक भी पहुंचना चाहिए।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

