आंध्र प्रदेश: एंबुलेंस के लिए नहीं थी सड़क, बीमार महिला को खाट पर लादकर 11 किमी दूर अस्पताल ले गए परिजन

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 आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के सुदूर आदिवासी इलाके कोव्वुरु मंडल के एक गांव में सड़क की जर्जर स्थिति के कारण एक बीमार महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए लगभग 11 किलोमीटर तक खाट पर लादकर ले जाना पड़ा।

रविवार को कोराबू पद्मा नाम की महिला अचानक बीमार पड़ गई और उसकी हालत बिगड़ने लगी। गांव तक किसी भी वाहन के पहुंचने का कोई रास्ता नहीं था।

ऐसे में मजबूर होकर परिवार के सदस्यों और गांव वालों ने उसे डोली पर लिटाया और मर्रीपाकालु से पलकाजीदी तक लगभग 11 किलोमीटर का लंबा और मुश्किल रास्ता पैदल तय किया। वहां पहुंचने के बाद उसे एंबुलेंस के जरिए इलाज के लिए वाई रमावरम एरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दशकों से खराब सड़कें बनी मुसीबत

गांव वालों का कहना है कि मर्रीपाकालु से जाने वाली सड़क की हालत बेहद खस्ता है। रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर, गड्ढे, कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ घुमावदार हिस्से हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के मौसम में यह समस्या और भी विकराल हो जाती है, जिससे मरीजों को अस्पताल ले जाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे दशकों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द उनके गांव तक एक पक्की सड़क मंजूर कर बनवाई जाए। ग्रामीणों ने राज्य के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण और राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है।

स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर उठे सवाल

राज्य सरकार आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं सुधारने के कई बड़े दावे करती रही है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में घोषणा की थी कि सरकार 2027 तक हर आदिवासी परिवार को सुरक्षित पेयजल और पक्के मकान मुहैया कराएगी।

उन्होंने यह भी कहा था कि मरीजों को डोली में ले जाने की मजबूरी को खत्म करने के लिए फीडर एंबुलेंस, 108 आपातकालीन सेवाएं और 104 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी थी कि अडवी तल्ली बाटा कार्यक्रम के तहत 2,336 आदिवासी बस्तियों में सड़क संपर्क को बेहतर किया जा रहा है और अब तक 905 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जा चुकी हैं।

क्या है ड्रोन स्वास्थ्य सेवा की असलियत?

29 अगस्त को मुख्यमंत्री ने राज्य के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों के लिए ड्रोन-आधारित चिकित्सा परिवहन सेवा की भी शुरुआत की थी। स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव के अनुसार, अल्लूरी सीताराम राजू जिले में जनवरी 2026 से ही ड्रोन स्वास्थ्य प्रणाली की शुरुआत कर दी गई थी।

अब तक चार ड्रोन ने 1,800 से अधिक उड़ानें भरी हैं और 71,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है। इन ड्रोन्स के माध्यम से 596 सिकल-सेल नमूनों सहित 2,200 से अधिक मेडिकल सैंपल्स का परिवहन किया जा चुका है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस सेवा से 24,500 से अधिक मरीजों को फायदा हुआ है और 9,000 से अधिक टेस्ट संभव हो पाए हैं। ड्रोन्स का इस्तेमाल दवाओं, टीकों, मेडिकल सैंपल्स और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री को दुर्गम इलाकों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। पाडेरु के सरकारी जनरल अस्पताल सहित आठ स्वास्थ्य केंद्रों को ड्रोन नेटवर्क से जोड़ा गया है।

सरकार का दावा है कि इस प्रणाली से यात्रा के समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है, जिससे आदिवासी मरीजों को तेजी से चिकित्सा सेवाएं मिल रही हैं। इसके अलावा 25 से अधिक स्थानीय और आदिवासी युवाओं को ड्रोन ऑपरेशंस का प्रशिक्षण भी दिया गया है।

हालांकि, तमाम आधुनिक सुविधाओं और करोड़ों के सरकारी दावों के बावजूद, कोराबू पद्मा को 11 किलोमीटर तक डोली में ले जाने की घटना यह साबित करती है कि बुनियादी सड़क संपर्क के बिना सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं आज भी लोगों की पहुंच से कोसों दूर हैं।

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