हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को लेकर निजी बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने बड़ा खुलासा किया है। संसद में सरकार ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य बीमा दावों को खारिज करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत की जाती है तथा इस संबंध में नियामकीय व्यवस्था भी लागू है।
सरकार ने बताया कि हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को अस्वीकार करने का निर्णय केवल डॉक्टर की राय के आधार पर नहीं लिया जाता, बल्कि पॉलिसी की शर्तों, उपलब्ध मेडिकल दस्तावेजों और अन्य आवश्यक तथ्यों की जांच के बाद ही अंतिम फैसला किया जाता है।
सरकार के अनुसार, यदि किसी पॉलिसीधारक का क्लेम खारिज होता है और उसे निर्णय पर आपत्ति है, तो वह बीमा कंपनी की शिकायत निवारण प्रणाली के साथ-साथ संबंधित नियामकीय मंच पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा, बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निगरानी व्यवस्था भी लागू है।
हाल के समय में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्शन को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार के इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि क्लेम अस्वीकार करने की प्रक्रिया तय नियमों और पॉलिसी की शर्तों के अनुरूप संचालित की जाती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

