मध्यप्रदेश।सिंगरौली जिले के चितरंगी-कर्थुआ रोड स्थित सेवरा-पिपरवान क्षेत्र में संचालित एक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के रिटेल पेट्रोल पंप को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पंप संचालक लंबे समय से नियमों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए कमर्शियल कंपनियों को सीधे टैंकरों में नोजल के माध्यम से बड़े पैमाने पर डीजल की बिक्री कर रहा है। इतना ही नहीं, पूरे मामले की जानकारी संबंधित सेल्स ऑफिसर को होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। सूत्रों का दावा है कि संबंधित पंप पर रात के समय नियमित रूप से टैंकरों में ईंधन भरकर कमर्शियल कंपनियों को आपूर्ति की जाती है। वायरल फोटो और वीडियो में भी एक टैंकर में ईंधन भराई जैसी गतिविधि दिखाई दे रही है, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

रिटेल और कमर्शियल डीजल के भाव में 35 से 39 रुपये तक का अंतर
जानकारों के अनुसार रिटेल पंपों पर मिलने वाले डीजल और औद्योगिक एवं कमर्शियल उपयोग के लिए मिलने वाले डीजल की कीमतों में लगभग 35 से 39 रुपये प्रति लीटर तक का अंतर होता है। यही कारण है कि कई कमर्शियल कंपनियां निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय रिटेल पंपों से ईंधन खरीदने का प्रयास करती हैं।
सूत्रों का कहना है कि कुछ कंपनियां रिटेल पंप संचालकों से सांठगांठ कर निर्धारित मूल्य से कुछ रुपये अधिक भुगतान कर सीधे टैंकरों में ईंधन भरवा लेती हैं। इससे कंपनियों को प्रति लीटर भारी बचत होती है, वहीं पंप संचालकों को भी अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित तेल कंपनी को राजस्व का नुकसान होने की आशंका रहती है।

क्या नियमों के विरुद्ध हो रही है बिक्री?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित पंप संचालक इंडियन ऑयल के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए कमर्शियल उपयोग के लिए ईंधन उपलब्ध करा रहा है। बताया जाता है कि बड़े पैमाने पर ईंधन की आपूर्ति के लिए तेल कंपनियों द्वारा अलग व्यवस्था और निर्धारित प्रक्रिया बनाई गई है। इसके बावजूद यदि किसी रिटेल आउटलेट से सीधे टैंकरों में ईंधन भरा जा रहा है, तो यह गंभीर जांच का विषय हो सकता है।जानकारों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि सुरक्षा मानकों से भी जुड़ा मामला है। पेट्रोलियम पदार्थ अत्यंत ज्वलनशील होते हैं और इनके भंडारण व परिवहन के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल: शिकायतों के बाद भी सेल्स ऑफिसर मौन क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा संबंधित सेल्स ऑफिसर की भूमिका को लेकर हो रही है। सूत्रों का दावा है कि उन्हें कई बार इस कथित अनियमितता की जानकारी दी गई है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि यदि किसी पंप पर नियमों के विपरीत बड़े पैमाने पर ईंधन बिक्री हो रही है तो उसकी निगरानी और जांच की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित सेल्स ऑफिसर की होती है। ऐसे में शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई न होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।
आपको ज्ञात हो कि यदि कथित अनियमितताएं नहीं हो रही थीं तो शिकायतों की जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई? और यदि अनियमितताएं हो रही थीं तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं।

मामले को लेकर अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के उच्च अधिकारियों, क्षेत्रीय प्रबंधन तथा जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच होना चाहिए। पूरे प्रकरण की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि क्या वास्तव में रिटेल आउटलेट से कमर्शियल कंपनियों को नियमों के विपरीत ईंधन की बिक्री की जा रही थी।यदि, जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो न केवल संबंधित पंप संचालक बल्कि निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच आवश्यक होगी।
उठ रहे प्रमुख सवाल
- क्या रिटेल पेट्रोल पंप से टैंकरों में बड़े पैमाने पर ईंधन भरा जा रहा था?
- क्या संबंधित सेल्स ऑफिसर को इसकी जानकारी थी?
- शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- रिटेल और कमर्शियल ईंधन के मूल्य अंतर का लाभ किसे मिल रहा था?
- क्या तेल कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा था?
- क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी?


