सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों को पंजाब सरकार की जीवनजोत स्कीम से जिंदगी की नई राह मिली है। सड़कों पर भीख मांगने वाले या परिवार से बिछड़ चुके 1150 बच्चों को बीते दो वर्ष में शिक्षा देकर मुख्य धारा में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कई बच्चों को मजबूरन भीख मांगने के लिए मजबूर किया जा रहा था, तो कुछ के अभिभावक उन्हें छोड़ गए।
सरकार ने जीवनजोत स्कीम के तहत इन बच्चों को पंजाब के विभिन्न एरिया से तलाश कर उन्हें ना सिर्फ उनके परिवार से मिलवाया बल्कि उन्हें शिक्षित करने के लिए विशेष प्रोजेक्ट भी चलाया। मंगवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन(एमजीएसआइपी) में खास बच्चों को लेकर आयोजित विशेष वर्कशाप में पंजाब की केंद्रीय मंत्री डा.बलजीत कौर पहुंची।
डॉ. कौर ने बातचीत करते हुए कहा कि प्रदेश में 1150 के करीब बच्चों को दो वर्ष में ढूंढकर उन्हें परिवार से मिलवाया और फिर उन्हेंं शिक्षित करने की जिम्मेदारी भी प्रदेश सरकार ने उठाई है। उन्होंने कहा कि जीवनजोत स्कीम का गरीब बच्चों को बहुत फायदा हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार न सिर्फ इन बच्चों को शिक्षित करेगी बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि 400 बच्चे इस समय विभिन्न स्कूल में दाखिल किए गए हैं ,जिन्हें पूरी तरह से आम बच्चों की तरह शिक्षित किया जा रहा है। इन बच्चों की शिक्षा को लेकर लगातार सरकार और विभाग की ओर से फालोअप किया जा रहा है। इन बच्चों में 13 साल तक के बच्चे शामिल हैं।
डीएनए टेस्ट से की जा रही पहचान
कैबिनेट मंत्री डॉ. कौर ने कहा कि जो बच्चे परिवार से बिछुड़ जाते हैं या जिन्हें उनके परिवार वाले छोड़ जाते हैं उन्हें मिलाने के लिए सरकार की ओर से डीएनए टेस्ट की मदद ली जाती है। विभाग की ओर से हेल्पलाइन नंबर 1097 पर जितने भी बच्चों को लेकर कोई शिकायत मिलती हैं उनपर तुरंत एक्शन लिया जाता है।
पूरे पंजाब में दो हजार से अधिक रेड कर बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। बच्चों की किडनैपिंग के कितने मामले आए इस सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई केस अभी नहीं आया है, लेकिन हर शिकायत पर विभाग की ओर से तुरंत कार्रवाई की जाती है।
जीवनजोत स्कीम के तहत जिन बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है उनमें करीब आधी संख्या लड़कियों की है। जीवनजोत-2 स्कीम का काफी अच्छा रिस्पांस मिला है।


