क्या है 12 रिजर्व सीटों का विवाद? PoK से लंदन तक क्यों गूंज रहा है यह मुद्दा!

PoK लगातार हिंसा की आग में जल रहा है। पाकिस्तानी आर्मी के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पाकिस्तान आर्मी और सरकार के खिलाफ बड़ा आंदेलन छेड़ दिया है। जिसकी गूंज लंदन तक सुनाई दे रही है।

लंदन स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर भी सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने PoK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और राजनीतिक दमन के खिलाफ नारेबाजी की।

क्या है 12 आरक्षित सीटों का विवाद?

PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। विवाद उन 12 सीटों को लेकर है, जो इन 45 सीटों में शामिल हैं और शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।

ये सीटें उन लोगों के लिए निर्धारित हैं, जो 1947, 1965 और 1971 के युद्धों या अन्य संघर्षों के दौरान जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में जाकर बस गए थे। इनमें 6 सीटें जम्मू से आए शरणार्थियों और 6 सीटें कश्मीर घाटी से आए शरणार्थियों के लिए हैं।

JAAC ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर करने का लगाया आरोप

JAAC और अन्य स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन आरक्षित सीटों की वजह से PoK में रहने वाली स्थानीय आबादी का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हो रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्र के भविष्य से जुड़े फैसलों का अधिकार केवल वहां रहने वाले लोगों के पास होना चाहिए, न कि बाहर बसे लोगों के पास।

आंदोलन क्यों हुआ तेज?

JAAC लंबे समय से इन 12 सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों पर चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होती और इसका फायदा कुछ खास राजनीतिक परिवारों को मिलता है। इसी मुद्दे ने अब बड़े जनआंदोलन का रूप ले लिया है। दरअसल, 27 जुलाई को PoK में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले आरक्षित सीटों का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है।

‘मुजफ्फराबाद समझौता’ भी बना वजह

मौजूदा विवाद के पीछे अक्टूबर 2025 में हुआ ‘मुजफ्फराबाद समझौता’ भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। यह समझौता पाकिस्तान सरकार, PoK प्रशासन और JAAC के बीच पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद हुआ था।

उस समय सरकार ने गेहूं और बिजली पर सब्सिडी, आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा, प्रशासनिक सुधार, बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाएं और स्थानीय अधिकार मजबूत करने जैसे कई वादे किए थे।

हालांकि JAAC का आरोप है कि सरकार ने इनमें से अधिकांश वादों को लागू नहीं किया। संगठन का कहना है कि स्थानीय अधिकारों, विकास योजनाओं और आर्थिक राहत को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

9 जून से हड़ताल का एलान

इन्हीं मुद्दों को लेकर JAAC ने 9 जून से पूरे PoK में हड़ताल और व्यापक आंदोलन का आह्वान किया। संगठन का कहना है कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल आश्वासन देती रही, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।

वहीं पाकिस्तान सरकार का दावा है कि JAAC की अधिकांश मांगें पहले ही मान ली गई हैं। लेकिन स्थानीय स्वायत्तता, आरक्षित सीटों और दीर्घकालिक सब्सिडी जैसे मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है।

लंदन तक पहुंचा विरोध

PoK के समर्थन में लंदन में भी प्रदर्शन हुए। पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शनकारियों ने ‘आजादी’ के नारे लगाए और पाकिस्तान सरकार पर क्षेत्र में असंतोष को दबाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग भी की।

सिर्फ सीटों का नहीं, कई मुद्दों का गुस्सा

JAAC केवल आरक्षित सीटों का ही विरोध नहीं कर रहा है। संगठन महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी, खराब प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक उपेक्षा जैसे मुद्दों को भी उठा रहा है। पिछले दो वर्षों में आटा और बिजली की बढ़ती कीमतों के खिलाफ भी कई बड़े आंदोलन हो चुके हैं, जिनमें सुरक्षा बलों के साथ झड़पें देखने को मिली थीं।

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