बिहार में एक और ‘विक्रमशिला सेतु’, चंपारण गोपालगंज गंडक पुल में 5 दिनों में 5 इंच बढ़ा गैप

बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु की तर्ज पर अब पश्चिम चंपारण और गोपालगंज को जोड़ने वाले गंडक महासेतु पर भी बड़ा संकट मंडराने लगा है।

मंगलपुर-गोपालगंज मुख्य सड़क पर स्थित इस गंडक नदी पुल में आई दरार का गैप लगातार चौड़ा होता जा रहा है। पिछले पांच दिनों के भीतर ही यह गैप 5 इंच और बढ़ गया है।

शुरुआत में यह दरार करीब सात इंच के आसपास थी, जो अब खतरनाक रूप लेते हुए बढ़कर 12 इंच (एक फीट) तक पहुंच गई है।

पुल के पिलर नंबर 14 के पास स्थित स्प्रिंग के दब जाने के कारण यह गंभीर दरार आई है, जिससे स्थानीय प्रशासन और आम लोगों में हड़कंप मच गया है।

भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक

पुल में आई दरार की भयावहता को देखते हुए विभाग ने तुरंत एहतियाती कदम उठाए हैं। पुल के दोनों ओर बैरियर लगाकर भारी वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

हालांकि, मालवाहक गाड़ियां बंद होने के बावजूद दरार का दायरा लगातार बढ़ने से स्थानीय ग्रामीण बेहद चिंतित हैं। ग्रामीण संजय कुशवाहा के मुताबिक, अब तक विभाग की ओर से धरातल पर मरम्मत का कोई काम शुरू नहीं किया जा सका है।

वर्तमान में इस पुल से केवल दोपहिया और तीनपहिया वाहन ही गुजर रहे हैं, लेकिन रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार में आने वाले अनजान चालकों के लिए यहाँ हर वक्त भीषण हादसे का खतरा बना हुआ है।

ठप हुआ यूपी-बिहार का व्यापार

करीब 550 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना यह पुल उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों के बीच लाइफलाइन माना जाता है।

दिल्ली और यूपी से पूर्वी व पश्चिमी चंपारण तक आने वाले मालवाहक ट्रक इसी रूट का इस्तेमाल करते हैं। पुल बंद होने से स्थानीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

सबसे बुरा असर मंगलपुर कला, गुदरिया, शिवराजपुर और कोतराहां जैसे दर्जनों गांवों के किसानों पर पड़ा है। स्थानीय किसान राजेश पांडेय, दीपक तिवारी, अरविंद कुमार और हरिओम यादव ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वे रोज सुबह खेतों से ताजी सब्जियां तोड़कर गोपालगंज और सिवान की बड़ी मंडियों में अच्छे दामों पर बेचते थे।

अब भारी वाहनों के साथ-साथ लोडिंग गाड़ियों पर रोक लगने के कारण उन्हें अपनी उपज कौड़ियों के भाव स्थानीय बाजारों में बेचनी पड़ रही है। वहीं, यूपी से आने वाले सामान की सप्लाई चेन टूटने से माल भाड़ा भी बढ़ गया है।

पुल संकट की प्रमुख बातें

  • परियोजना की लागत: ₹550 करोड़
  • संकट का कारण: पिलर नंबर 14 का स्प्रिंग दबने से आई दरार
  • गैप की वर्तमान स्थिति: 5 दिनों में 7 इंच से बढ़कर हुआ 12 इंच (1 फीट)
  • वर्तमान यातायात: भारी वाहनों पर पूरी तरह रोक, केवल बाइक और ऑटो को अनुमति
  • प्रभावित क्षेत्र: पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सिवान समेत यूपी-दिल्ली की सप्लाई चेन

निर्माण कंपनी को दी गई सूचना

इस पूरे मामले पर सियासत और प्रशासनिक हलचल भी तेज है। नौतन विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय विधायक नारायण प्रसाद ने बताया कि पुल की स्थिति बेहद संवेदनशील है और इसके सुधार को लेकर पंचायती राज/सड़क निर्माण विभाग और संबंधित निर्माण कंपनी को तुरंत अलर्ट जारी कर दिया गया है।

निर्माण कंपनी के इंजीनियरों की टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्से का मुआयना और तकनीकी निरीक्षण कर लिया है। विधायक ने आश्वासन दिया है कि पुल की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर जल्द ही शुरू कराया जाएगा, ताकि इस रूट पर यातायात को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य किया जा सके।

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