नवगछिया पुलिस केंद्र में दो वर्ष पूर्व आवास भत्ता घोटाला सामने आया था। पर अधिकारियों की मिलीभगत से घोटाले की फाइल दबा दी गई थी।
यह घोटाला तब हुआ जब सब-इंचार्ज सार्जेंट हरिओम कुमार और कांस्टेबल शशि शर्मा ने आवास भत्ता सूची से अपना नाम हटवाकर और आडिट कराकर तीन वर्षों का भत्ता गबन कर लिया था।
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद आईजी विवेक कुमार ने नवगछिया एसपी को जांच कर कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया था।
उन्होंने कहा था कि यदि अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी भी इस तरह की गड़बड़ी में शामिल हैं, तो उनकी भी जांच की जाए। लेकिन नवगछिया एसपी ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
सार्जेंट और कॉन्स्टेबल ने किया था फर्जीवाड़ा
नवगछिया पुलिस केंद्र में इस घोटाले के पीछे की साजिश ने एसपी को भी कठघरे में ला खड़ा किया था। सरकारी 8 एलएच आवासों में से सार्जेंट हरिओम कुमार और कॉन्स्टेबल शशि शर्मा ने किराए में फर्जीवाड़ा किया था।
31 जुलाई 2025 को तत्कालीन नवगछिया एसपी प्रेरणा कुमार ने आवंटित आवासों में रहने वाले पुलिसकर्मियों से उनके वेतन से किराया वसूलने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद छह पुलिसकर्मियों से निर्धारित मानक पर किराया लिया गया।
किराया वसूली के दौरान भी खेल
आवंटित छह आवासों से किराया वसूली के दौरान भी खेल किया गया। पुलिस केंद्र और कार्यालय का ऑडिट 16 से 27 मई 2025 तक किया गया था।
ऑडिट के दौरान हवलदार शशि शर्मा और सार्जेंट हरिओम कुमार ने अपने आवासों की जानकारी छिपाते हुए छह आवासों की सूची पेश की, जिसके आधार पर ऑडिट टीम ने रिपोर्ट तैयार की।
इस धोखे के कारण नवगछिया एसपी के संज्ञान में मामला नहीं आया। ऐसे कई अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी भी हैं जिन्होंने विभाग को धोखा दिया है और मकान किराए में हेराफेरी की है।


