आरएसएस के 100 वर्ष पूर्ण: ‘गृह संपर्क महाअभियान’ की शुरुआत, घर–घर पहुंचकर बताया जा रहा संघ का इतिहास और सेवा कार्य

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बेगूसराय जिले के भगवानपुर प्रखंड के महेशपुर पंचायत अंतर्गत अतरुआ गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘गृह संपर्क महाअभियान’ की शुरुआत की गई। ‘आओ बनाएं समर्थ भारत’ के नारे के तहत संघ के स्वयंसेवक गांव–गांव, घर–घर जाकर संगठन की स्थापना, उद्देश्यों, कार्यक्रमों और सेवा गतिविधियों की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

स्वयंसेवक विरेंद्र पंडित, महेश साहनी और विपिन कुमार साहनी ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक संघ के कार्य और उसकी राष्ट्रनिर्माण में भूमिका का विस्तृत परिचय देना है।

इसके लिए पर्चियों और व्यक्तिगत संवाद का सहारा लिया जा रहा है। स्वयंसेवक लोगों से सीधे मिलकर संघ के इतिहास, उसके विस्तार और समाज सेवा से जुड़े प्रकल्पों की जानकारी दे रहे हैं।

संघ कार्यकर्ताओं ने बताया कि 1925 की विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी।

सौ वर्ष पूरे होने तक संघ एक विशाल सामाजिक संगठन के रूप में विकसित हो चुका है, जिसका लक्ष्य एक संगठित, सक्षम और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण है।

डॉ. हेडगेवार का विश्वास था कि राष्ट्र की मजबूती का आधार समाज का संगठन और अनुशासन है, इसी सिद्धांत पर आरएसएस की कार्यसंस्कृति आधारित है।

आज देश के अधिकांश जिलों, खंडों तथा मंडलों में संघ की शाखाएं नियमित रूप से संचालित होती हैं। छात्रों और व्यवसायियों की अलग-अलग दैनिक शाखाओं के साथ साप्ताहिक मिलन, बौद्धिक कार्यक्रम और सेवा प्रकल्पों के माध्यम से समाज से प्रत्यक्ष जुड़ाव निरंतर बढ़ रहा है।

संघ से जुड़े स्वयंसेवक स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्राम विकास, जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण, गौ–संरक्षण और स्वावलंबन जैसी गतिविधियों पर आधारित एक लाख 29 हजार से अधिक सेवा प्रकल्पों के माध्यम से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।

स्वयंसेवकों ने बताया कि आपदा और संकट के समय सबसे पहले पहुंचकर राहत–बचाव में सहयोग करना आज संघ की पहचान बन चुकी है।

शताब्दी वर्ष में प्रारंभ हुआ यह गृह संपर्क अभियान न केवल संगठन के इतिहास को जनता के बीच ले जा रहा है, बल्कि समाज को जागरूक, संगठित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

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