भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा कि बिलाई मिल को किसान गन्ना नहीं देंगे। जिस दिन मिल इंडेंट जारी करेगी उसी दिन संगठन भी समितियों में पूजन की इंडेंट जारी करेगा। मिल में तौल वाले दिन एक हजार किसान 50-50 क्विंटल गन्ना लेकर आएंगे और कलक्ट्रेट या डीएम आवास पर भरेंगे। संगठन किसानों के साथ रहेगा।
जहां भी उन्हें रोकने के लिए पहला बैरियर लगाया जाएगा वहीं वे गन्ना पलट देंगे और लौट आएंगे। लेकिन इस गन्ने के पैसे की जिम्मेदारी डीएम की होगी। गन्ना देने के 14 दिन बाद किसान भुगतान भी डीएम से ही लेंगे। डीएम चाहें तो कहीं भी कांटा लगवा लें किसान वहीं गन्ना तौल देंगे लेकिन मिल को नहीं। पहले दिन एक हजार किसान 50 हजार क्विंटल गन्ना लाएंगे और बाद में ये संख्या बढ़ती जाएगी।
कहा कि शासन-प्रशासन ने केवल तीन क्रय केंद्र काटकर बिलाई को संरक्षण देने का काम किया है। मिल ने शीरा बेचकर पैसा अपने काम में लगा लिया और प्रशासनिक अधिकारियों ने ही इसमें साथ दिया। कहा कि जीआरएस पोर्टल पर भी किसानों ने शिकायत की थी जिसे अधिकारियों ने जिले की रैंकिंग खराब होने का हवाला देते हुए रूकवाया था।
अब वह अभियान भी फिर से शुरू किया जाएगा। कहा कि संगठन उद्योगों का विरोधी नहीं है लेकिन अब पानी सिर से उतर गया है। कुछ किसान संगठनों के बड़े नेता भी मिल अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों की आवाज को दबाना चाहते हैं। किसानों को भी उनकी असलियत समझ में आने लगी है। जिलाध्यक्ष नितिन सिरोही ने कहा कि लेखपालों के गलत गाटा संख्या भरने से किसान धान तक नहीं बेच पा रहे। प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल कुमार ने गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग की।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

