आसमान में राफेल, सुखोई और तेजस की गर्जना, पीएम नरेन्द्र मोदी एयर शो में हुए शामिल
काशी में वायु सेना के एयर शो के तीसरे दिन रविवार को सुबह से ही गंगा घाटों पर एयर शो देखने वालों का हुजूम उमड़ने लगा था। सुबह नौ बजे से भीड़ जुटनी शुरू हो गई और सभी अपने स्थान सीढ़ियों पर कब्जा लिए और सभी की नजरें आसमान पर होने वाले विमानों के करतब पर टिक गईं।
आयोजन में शामिल होने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी रविवार की सुबह 10.10 बजे ही वाराणसी एयरपोर्ट पहुंच गए। एयरपोर्ट से ही अरविंद मिल की नई यूनिट का उद्घाटन करने मिर्जामुराद के खोचवां पहुंचे जहां 40 महिला कर्मियों से संवाद किया। इसके बाद हेलीकाप्टर से पुलिस लाइन ग्राउंड पहुंचे और वायु सेना दिवस की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘विंग्स ओवर गंगा’ थीम पर आयोजित एयर शो देखने नमो घाट गए।
‘हनुमान’ कॉलसाइन के तहत एक सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान ने कम ऊंचाई पर एरोबेटिक प्रदर्शन किया। दो इंजन वाला यह लड़ाकू विमान तेज आवाज और अपने बड़े आकार के कारण दर्शकों का ध्यान खींचता है। विमान की नियंत्रित उड़ान और मोड़ देखते हुए घाटों पर मौजूद लोग आसमान की ओर देखते रहे। सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है और हवाई सुरक्षा के साथ जमीन पर लक्ष्यों के विरुद्ध अभियान चलाने में सक्षम है। इस फॉर्मेशन में विमान की एकल प्रस्तुति ने समूह में उड़ते विमानों के बीच अलग तरह का रोमांच पैदा किया। दर्शकों की तालियां और उत्साह विमान के गुजरने के बाद भी सुनाई देते रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को रूपापुर (खोचवां) के निकट हाईवे किनारे स्थापित अरविंद मिल की नई इकाई का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने कंपनी में कार्यरत नारी शक्ति से संवाद भी किया। इस दौरान कारखाने का भ्रमण कर उत्पादों की जानकारी भी ली। इसके बाद दोपहर 12 बजे पीएम नरेन्द्र मोदी नमो घाट पर होने वाले आयोजन में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
सारनाथ’ फॉर्मेशन में एक ऐतिहासिक हार्वर्ड विमान ने हवाई करतब दिखाए। आधुनिक लड़ाकू विमानों की तेज उड़ानों के बीच पुराने विमान की प्रस्तुति ने दर्शकों को विमानन इतिहास की याद दिलाई। हार्वर्ड विमान का इस्तेमाल प्रशिक्षण के लिए किया जाता रहा है और इसकी बनावट आधुनिक लड़ाकू विमानों से अलग दिखाई देती है। इस विमान की उड़ान ने एयर शो को केवल आधुनिक सैन्य तकनीक का प्रदर्शन नहीं रहने दिया, बल्कि विमानन के पुराने दौर से भी जोड़ा। गंगा के ऊपर विमान के गुजरने पर दर्शक उसकी आकृति और उड़ान शैली को ध्यान से देखते रहे। इस प्रस्तुति की खासियत उसकी ऐतिहासिक पहचान और आधुनिक विमानों के बीच उसका अलग स्थान था।
‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन में सुबह 11.50 बजे तीन राफेल लड़ाकू विमानों के समूह में उड़ान भरने का कार्यक्रम था। फ्रांस में निर्मित राफेल भारतीय वायुसेना का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है। इसका उपयोग हवाई सुरक्षा, जमीन पर लक्ष्यों के विरुद्ध कार्रवाई और विभिन्न सैन्य अभियानों में किया जा सकता है। तीन विमानों का समूह गंगा के ऊपर से गुजरते हुए दर्शकों के लिए प्रमुख आकर्षण बना। राफेल की तेज आवाज सुनकर लोगों की निगाहें आसमान पर उठीं और समूह के विमानों की आकृति पर ध्यान गया। एक साथ उड़ते विमानों के बीच उचित दूरी बनाए रखना पायलटों के कौशल और तालमेल का हिस्सा है।
हवाई प्रदर्शन की शुरुआत ‘काशी’ फॉर्मेशन से हुई। तीन किरण विमानों ने वी आकार के विक फॉर्मेशन में उड़ान भरी। विमानों के पीछे निकलती तिरंगे के रंगों वाली धुएं की धारियों ने गंगा के ऊपर आसमान को अलग रंग दे दिया। घाटों पर मौजूद दर्शकों ने एक साथ उड़ते विमानों को देखकर तालियां बजाईं। फॉर्मेशन का नाम काशी की पहचान से जुड़ा होने के कारण यह प्रदर्शन स्थानीय दर्शकों के लिए खास मायने रखता था। विमान तय दूरी बनाए रखते हुए आगे बढ़े और उनकी समन्वित उड़ान ने हवाई प्रदर्शन की शुरुआत का संकेत दिया। घाटों और दूसरी ओर रामनगर से लोग आसमान में बनती आकृति को देखते रहे। तिरंगे की धारियां दिखाई देने पर दर्शकों की निगाहें विमानों के पीछे बन रही रंगीन रेखाओं पर टिक गईं।
‘काशी’ फॉर्मेशन के बाद ‘वरुणा’ में तीन एएलएच मार्क III हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी। इस फॉर्मेशन में भारतीय वायुसेना और भारतीय थल सेना के हेलीकॉप्टर शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान रस्सी के सहारे जवानों को नीचे जलयान पर उतारने की प्रक्रिया यानी स्लिदरिंग ऑपरेशन का कौशल दिखाया गया। हेलीकॉप्टरों की नियंत्रित उड़ान और उनके नीचे उतरने की प्रक्रिया ने दर्शकों का ध्यान खींचा। यह प्रदर्शन केवल हवाई करतब नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में जवानों को तेजी से निर्धारित स्थान तक पहुंचाने की क्षमता का परिचय भी देता है। गंगा के ऊपर उड़ते हेलीकॉप्टरों को देखकर दर्शक उनकी दिशा और ऊंचाई पर नजर रखते रहे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

