श्रद्धा वालकर हत्याकांड मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने गूगल, व्हाट्सऐप, जीमेल और बंबल से जुड़े विदेश में कार्यरत नोडल अधिकारियों की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यानी VC के जरिए दर्ज करने की अनुमति दे दी है। इस मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी है और अब डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े गवाहों के बयान दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
1 दिसंबर से दर्ज होंगे गवाहों के बयान
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस की याचिका स्वीकार करते हुए विदेशी गवाहों की ऑनलाइन गवाही की अनुमति दी। अदालत के अनुसार, इन अधिकारियों को अमेरिका और ब्रिटेन से भारत बुलाने में काफी समय और खर्च लग सकता है। ऐसे में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही दर्ज करने से मुकदमे की सुनवाई में अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।
अदालत ने निर्देश दिया है कि 1 दिसंबर 2026 से प्रतिदिन एक गवाह का बयान दर्ज किया जाएगा।
चार विदेशी अधिकारियों की होगी गवाही
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार नोडल अधिकारियों को गवाह बनाया है। इनमें व्हाट्सऐप और मेटा प्लेटफॉर्म्स से जुड़े एड्रियन सिल्वेरा, गूगल के शेल्बी स्मिथ, जीमेल की आरती सेठ और बंबल ग्रुप के ल्यूक मित्सी शामिल हैं।
इनमें तीन अधिकारी अमेरिका में और एक अधिकारी ब्रिटेन में कार्यरत हैं। अभियोजन पक्ष इन अधिकारियों के माध्यम से संबंधित कंपनियों के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को अदालत के सामने प्रस्तुत करना चाहता है।
साकेत कोर्ट में बनेगा मुख्य केंद्र
अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही दर्ज कराने के लिए साकेत कोर्ट परिसर स्थित दक्षिण जिला अदालत के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष को मुख्य केंद्र बनाने का निर्देश दिया है।
विदेश में मौजूद प्रत्येक गवाह के लिए उसके स्थान के अनुसार संबंधित भारतीय दूतावास या उच्चायोग में दूसरा केंद्र निर्धारित किया जाएगा। वहां नियुक्त अधिकारी गवाही की प्रक्रिया में समन्वय करेंगे। मामले के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राम सिंह को भी आवश्यक अनुमतियों और व्यवस्थाओं के लिए संपर्क अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डिजिटल साक्ष्यों पर रहेगी नजर
इस मामले में डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हैं। जांच के दौरान तकनीकी कंपनियों से संबंधित जानकारी और रिकॉर्ड जुटाए गए हैं। इन कंपनियों के अधिकारियों की गवाही से अभियोजन पक्ष को अपने साक्ष्यों को औपचारिक रूप से अदालत के समक्ष रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसी गवाह की गवाही या कंपनी के रिकॉर्ड का अदालत में पेश होना अपने आप में आरोप साबित होने के बराबर नहीं है। साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उनका महत्व अदालत द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत परखा जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
श्रद्धा वालकर हत्याकांड मई 2022 का मामला है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आफताब अमीन पूनावाला ने दिल्ली के महरौली इलाके में श्रद्धा की हत्या की थी। इस मामले में पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया और मुकदमा अदालत में चल रहा है। आरोपी के खिलाफ आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
निष्कर्ष: श्रद्धा वालकर हत्याकांड में विदेशी तकनीकी कंपनियों के चार अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही दर्ज करने की अनुमति मिलने से मुकदमे की अगली प्रक्रिया को गति देने की कोशिश की जा रही है। अब 1 दिसंबर 2026 से प्रस्तावित गवाही पर नजर रहेगी। इन बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

