जम्मू-कश्मीर में घट रही ग्रैजुएट्स की संख्या, तीन साल में 22% से ज्यादा की गिरावट; रोजगार के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे
जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा और रोजगार को लेकर एक अहम तस्वीर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र शासित प्रदेश के कॉलेजों से ग्रैजुएट होने वाले छात्रों की संख्या पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों में 22 फीसदी से अधिक घट गई है। 2023-24 में जहां 23,655 छात्र ग्रैजुएट हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 18,312 रह गई।
आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में कॉलेजों से ग्रैजुएट होने वाले छात्रों की संख्या 21,153 रही थी। इसके बाद 2025-26 में इसमें और कमी दर्ज की गई। जम्मू जिले में भी ग्रैजुएट्स की संख्या 2023-24 के 5,930 से घटकर 2025-26 में 3,906 रह गई। वहीं श्रीनगर में यह संख्या 4,190 से घटकर 3,352 हो गई।
डिग्री के बाद रोजगार की तस्वीर क्या है?
इस गिरावट के साथ एक दूसरी चुनौती भी सामने आई है। जम्मू-कश्मीर सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, प्रदेश के सरकारी डिग्री कॉलेजों से हर साल करीब 25,000 से 30,000 छात्र ग्रैजुएट होते हैं, लेकिन 2023-24 से 2025-26 तक उनकी रोजगार-योग्यता, प्लेसमेंट दर, औसत वेतन और सेक्टरवार रोजगार को लेकर कोई समेकित मानकीकृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
विभाग ने बताया है कि रोजगार के नतीजों को समझने के लिए प्लेसमेंट ड्राइव, करियर काउंसलिंग और संस्थागत स्तर पर ट्रैकिंग को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, नई शिक्षा नीति के अनुरूप एलुमनी और रोजगार-परिणामों की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है।
अब आगे क्या?
सरकार की ओर से कॉलेजों में घटते दाखिलों और रोजगार की बदलती जरूरतों को देखते हुए पाठ्यक्रमों को अधिक रोजगार-केंद्रित बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और रिमोट सेंसिंग जैसे क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव है। ग्रामीण और दूरदराज के कॉलेजों में विषयों और पाठ्यक्रमों की समीक्षा के साथ क्लस्टर आधारित अकादमिक मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर स्किल डेवलपमेंट मिशन भी युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार बाजार से जोड़ने के लिए अलग-अलग कौशल विकास कार्यक्रम चला रहा है। इसके तहत आईटी-आईटीईएस, हेल्थकेयर, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों को कौशल प्रशिक्षण के दायरे में रखा गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

